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भाषा विकास क्या है | Bhasha Vikas Kya hai | Principles of language development

Bhasha Vikas Kya hai

भाषा विकास क्या है ? Bhasha Vikas Kya hai

भाषा विकास का मुख्य बिन्दु  Bhasha Vikas Kya hai

  • बालक के भाषा विकास(Bhasha Vikas Kya hai) की सबसे छोटी इकाई स्वनिम होती है थ, च, क स्वनीम ध्वनियां है। भाषा की सबसे छोटी सार्थक इकाई रहीम है जिससे morphine कहते हैं।

Eg  :रा+म = राम

  • बालक के भाषा की शुरुआत रूदम एवं क्रंदन से होती है तथा रिवील नेम रुदन को आपातकालीन स्वसन मना है।
  • हकलाना या तुतलाना भाषा के विकार है कोई बीमारी नहीं है हकलाना छुड़ाने के लिए संवर्धित वाक्य का सहारा लिया जाता है।
  • प्रारंभिक बचपन भाषा विकास की दृष्टि से संवेदनशील अवस्था है।
  • 2 वर्ष के बालक 50 वाक्य 2 शब्द वाले बोल सकते हैं।
  • बालक की शुरुआती वर्ण व्यंजन तथा शुरुआती शब्द विशेषण भी होता है।

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भाषा के सिद्धांत

अनुबंधन का सिद्धांत

यह सिद्धांत पवलब के सिद्धांत से प्रेरित होकर जिसके अनुसार बालक भाषा के नवीन वर्गों को अपने पूर्व ज्ञान से जोड़कर सीखते हैं

जैसे : आ को सीखने के लिए इसे आम के पूर्व ज्ञान से जोड़ना

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नोम चोमस्की का जन्मजात क्षमता का सिद्धांत

  • यह सिद्धांत प्रसिद्ध रूसी विचारक नोम चोमस्की ने दिया था उनके अनुसार भाषा की क्षमता जन्मजात होता है।
  • किसी भी भाषा को सीखने के लिए हममें भाषा ग्रहण यंत्र होता है। LAD full Form -language according device)
  • दुनिया के किसी भी भाषा को सीखने के लिए हमारे पास सार्वभौमिक व्याकरण संरचना जेनरेटिव ग्रामर(generative grammar full detail in Hindi) होता है।
  • जो मस्ती के सिद्धांत का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि लगभग सभी बच्चों में 1.5 वर्ष से 2 वर्ष में बोलने की क्षमता आ जाता है।

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ली वर्फ का सापेक्ष का सिद्धांत

  • यह सिद्धांत ली वर्फ की देन है जिन्होंने भाषा को वस्तु के सापेक्ष माना है।
    सिद्धांत के अनुसार भाषा वस्तु पर निर्भर करती है या वस्तु सापेक्ष होती है अर्थात जिस भाषा में जो वस्तु होगी वहां पर इसके कई नाम होंगे जबकि जिस भाषा में नहीं होगी वहां या तो इसके लिए एक, दो सीमित नाम नहीं होगा।
  • जैसे कि हिंदी में चौमिन शब्द या इंग्लिश में भारत के आमों की विभिन्न प्रजातियों के लिए mangoes

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भाषा के परिपक्वता का सिद्धांत

यह सिद्धांत विज्ञान की देन है जिसके अनुसार बालक में भाषा विकास तभी संभव है जब उसके भाषा विकास में या बोलने में प्रयोग होने वाले अंगों में परिपक्वता आ जाती है जैसे कि स्वर या वाक्य यंत्र (vocal chard)

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